एहतेशाम हुदवी
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इस्लाम इंसान को केवल इबादतों का तरीका नहीं सिखाता, बल्कि उसकी पूरी ज़िंदगी को पाकीज़ा, संतुलित (Balanced) और सम्मानपूर्ण (Dignified) बनाने की तालीम देता है। वह इंसानी फ़ितरत और उसकी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ नहीं करता, बल्कि उन्हें हलाल और सम्मानजनक रास्ता प्रदान करता है। इसी सिलसिले में निकाह को एक पाक...
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क़ुरआन मजीद अल्लाह तआला की वह महान किताब है जिसे उसने इंसान की हिदायत के लिए नाज़िल फ़रमाया। यह केवल तिलावत करने की किताब नहीं
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नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद ﷺ की ज़ात पूरी इंसानियत के लिए अल्लाह तआला की सबसे बड़ी नेमतों में से एक है। आप ﷺ की आमद से इंसानियत को ईमान की रोशनी मिली, कुफ़्र और शिर्क के अंधेरे से निजात का रास्ता मिला और इंसान को उसके रब से जोड़ने वाली हिदायत मिली।
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भारत की आज़ादी की कहानी केवल राजनीतिक नेताओं और सैनिकों की कहानी नहीं है। इसके पीछे उन विद्वानों की भी एक लंबी और गौरवपूर्ण दास्तान है जिन्होंने अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा विदेशी हुकूमत के ख़िलाफ़ संघर्ष में गुज़ार दिया।
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आज का दौर तेज़ी से बदलती हुई जीवनशैली, सोशल मीडिया और फैशन का दौर है। हर दिन कोई नया ट्रेंड सामने आता है और देखते ही देखते वह दुनिया भर के युवाओं में लोकप्रिय हो जाता है। कुछ वर्ष पहले तक टैटू (Tattoo) और शरीर के विभिन्न अंगों में पियर्सिंग (Piercing) केवल कुछ विशेष समुदायों या संस्कृतियों तक सीमित...
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भारत अनेक भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है। यहाँ सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। इन सबके बीच हिंदी करोड़ों लोगों की संपर्क भाषा (Link Language) के रूप में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
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इस्लामी साल में कुछ दिन ऐसे हैं जिन्हें अल्लाह तआला ने विशेष महत्व दिया है। उन्हीं महत्वपूर्ण दिनों में से एक है यौम-ए-आशूरा, यानी मुहर्रम की दसवीं तारीख़। यह केवल एक ऐतिहासिक दिन नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की मदद, नबियों की मुक्ति, सब्र, शुक्र और ईमान की जीत की याद दिलाने वाला दिन है।
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जब हम इस्लाम के इतिहास का अध्ययन करते हैं तो एक घटना ऐसी दिखाई देती है जिसने पूरे इतिहास की दिशा बदल दी। यह घटना है "हिजरत" (Migration)। सामान्य रूप से लोग हिजरत को मक्का से मदीना की यात्रा समझते हैं, लेकिन वास्तव में यह केवल एक यात्रा नहीं थी।
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नमाज़ तकबीर, तस्बीह और क़ुरआन की तिलावत का सुंदर संगम है। नमाज़ में क़ुरआन की कोई भी सूरह पढ़ी जाए, तो फ़र्ज़ अदा हो जाता है और नमाज़ सही (Valid) हो जाती है। लेकिन कुछ सूरहें ऐसी हैं जिनके बारे में अहादीस में स्पष्ट रूप से उल्लेख मिलता है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने उन्हें नमाज़ में पढ़ा, बल्कि कई सूरहों की...
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इस्लाम में कुछ ऐसे मुबारक औक़ात, मुक़द्दस लम्हात और बाबरकत दिन होते हैं जिनकी अहमियत दूसरी तारीख़ों से कहीं ज़्यादा होती है। इन दिनों में अल्लाह तआला अपनी रहमत, मग़फ़िरत, इनायत और रज़ा के ख़ज़ानों को अपने बंदों के लिए खोल देता है।
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क़ुर्बानी उस मुसलमान पर वाजिब (Obligatory) है जो मालिक-ए-निसाब (Owner of Nisab) हो। मालिक-ए-निसाब वह व्यक्ति है जिसके पास ईदुल-अज़हा के दिन अपनी ज़रूरी ज़रूरतों (Basic Needs) के अलावा साढ़े बावन तोला चाँदी या साढ़े सात तोला सोना, या उसकी कीमत के बराबर माल मौजूद हो।
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इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की कहानी भारत की सियासत में एक बहुत ही खास और अलग पहचान रखती है। यह पार्टी 1948 में उस समय बनी जब देश बंटवारे (Partition) के गहरे जख्म से गुजर रहा था। उस समय “मुस्लिम लीग” नाम अपने साथ एक भारी नकारात्मक छवि (negative image) लेकर आता था
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भारत में मुसलमानों के खिलाफ साजिशें अब नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। नौकरियों में तो पहले से भेदभाव चल रहा था, जहां मुसलमानों को मजहब की बुनियाद पर जॉब से महरूम किया जाता है। अब प्राइवेट कंपनियों, खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों में भी उन्हें रोजगार से बाहर करने की खतरनाक प्लानिंग की जा रही है।
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इज़राइल की नेसेट (Knesset) ने 30 मार्च, 2026 को एक कानून पारित किया, जिसके तहत फ़िलिस्तीनियों के लिए मृत्युदंड (Death Penalty) को डिफ़ॉल्ट सज़ा बना दिया गया।
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औरतों को चाहिए कि फ़र्ज़, नफ़्ल और तरावीह — यानी तमाम नमाज़ें अपने-अपने घरों में पढ़ें। कुछ जगहों पर तरावीह के नाम पर औरतें इकट्ठा हो रही हैं और देर रात के बाद घर वापस लौटती हैं। शरीअत के मुताबिक यह सही नहीं है।
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रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का सबसे मुबारक और रूहानी बदलाव लाने वाला महीना है। इसी महीने में क़ुरआन नाज़िल हुआ, जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत, सही और ग़लत के बीच फर्क बताने वाला) और रहमत है।
अपने सवाल और फ़तवे पूछें।
सवाल को जितना हो सके साफ़-साफ़ लिखें और हिंदी में टाइप करें। टाइप करते समय ग़लतियों से बचें। एक साथ कई सवाल न पूछें।
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