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एहतेशाम हुदवी

एहतेशाम हुदवी

  • इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML): इतिहास, पहचान और 2026 की सियासी कामयाबी भारतीय मुस्लिम
    • एहतेशाम हुदवी
    • May 4, 2026

    इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML): इतिहास, पहचान और 2026...

    इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की कहानी भारत की सियासत में एक बहुत ही खास और अलग पहचान रखती है। यह पार्टी 1948 में उस समय बनी जब देश बंटवारे (Partition) के गहरे जख्म से गुजर रहा था। उस समय “मुस्लिम लीग” नाम अपने साथ एक भारी नकारात्मक छवि (negative image) लेकर आता था

  • नासिक टीसीएस केस: मुसलमानों को कैसे बिना वजह निशाना बनाया जा रहा है भारतीय मुस्लिम
    • एहतेशाम हुदवी
    • Apr 19, 2026

    नासिक टीसीएस केस: मुसलमानों को कैसे बिना वजह निशाना बनाया...

    भारत में मुसलमानों के खिलाफ साजिशें अब नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। नौकरियों में तो पहले से भेदभाव चल रहा था, जहां मुसलमानों को मजहब की बुनियाद पर जॉब से महरूम किया जाता है। अब प्राइवेट कंपनियों, खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों में भी उन्हें रोजगार से बाहर करने की खतरनाक प्लानिंग की जा रही है।

  • फ़िलिस्तीनियों के लिए इज़रायल का मृत्युदंड क़ानून उभरते मुद्दे
    • एहतेशाम हुदवी
    • Mar 30, 2026

    फ़िलिस्तीनियों के लिए इज़रायल का मृत्युदंड क़ानून

    इज़राइल की नेसेट (Knesset) ने 30 मार्च, 2026 को एक कानून पारित किया, जिसके तहत फ़िलिस्तीनियों के लिए मृत्युदंड (Death Penalty) को डिफ़ॉल्ट सज़ा बना दिया गया।

  • औरतों की तरावीह में जमाअत से शामिल होने का शरीअती हुक्म शरीयत
    • एहतेशाम हुदवी
    • Feb 27, 2026

    औरतों की तरावीह में जमाअत से शामिल होने का शरीअती हुक्म

    औरतों को चाहिए कि फ़र्ज़, नफ़्ल और तरावीह — यानी तमाम नमाज़ें अपने-अपने घरों में पढ़ें। कुछ जगहों पर तरावीह के नाम पर औरतें इकट्ठा हो रही हैं और देर रात के बाद घर वापस लौटती हैं। शरीअत के मुताबिक यह सही नहीं है।

  • रमज़ान के महीने में ज़कात और सदक़ा की अहमियत शरीयत
    • एहतेशाम हुदवी
    • Feb 17, 2026

    रमज़ान के महीने में ज़कात और सदक़ा की अहमियत

    रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का सबसे मुबारक और रूहानी बदलाव लाने वाला महीना है। इसी महीने में क़ुरआन नाज़िल हुआ, जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत, सही और ग़लत के बीच फर्क बताने वाला) और रहमत है।

  • हमारा ईमान और सोशल मीडिया की ज़बान ईहसान
    • एहतेशाम हुदवी
    • Jan 31, 2026

    हमारा ईमान और सोशल मीडिया की ज़बान

    ईमान (Faith) एक बेहद नाज़ुक और अनमोल दौलत है। यह सिर्फ़ कुछ मान्यताओं (Beliefs) का नाम नहीं, बल्कि एक जीवित, संवेदनशील और लगातार देखभाल चाहने वाली आध्यात्मिक अवस्था (Spiritual State) है।

  • बाबरी मस्जिद की शहादत: भारत की धर्मनिरपेक्षता पर एक धब्बा भारतीय मुस्लिम
    • एहतेशाम हुदवी
    • Jan 21, 2026

    बाबरी मस्जिद की शहादत: भारत की धर्मनिरपेक्षता पर एक धब्बा

    6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद की शहादत भारतीय गणराज्य (Indian Republic) के संवैधानिक और नैतिक इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक माना जाती है। भारतीय मुसलमानों के लिए यह सिर्फ़ एक पुरानी मस्जिद का ढहाया जाना नहीं था, बल्कि यह उनकी गरिमा (Dignity), सुरक्षा (Security) और समान नागरिकता (Equal Citizenship)...

  • आकस्मिकता, अनंत प्रतिगमन और आवश्यक सत्ता: क़ुरआन और इस्लामी दृष्टि में एक सरल अध्ययन अल्लाह
    • एहतेशाम हुदवी
    • Dec 31, 2025

    आकस्मिकता, अनंत प्रतिगमन और आवश्यक सत्ता: क़ुरआन और इस्लामी...

    इस्लाम अल्लाह पर विश्वास को अंधी मान्यता (blind belief) के रूप में पेश नहीं करता, बल्कि सोच-विचार (thinking), तर्क (reason) और वह्य (revelation) पर आधारित मज़बूत आस्था के रूप में समझाता है।

  • हिजाब का उद्देश्य: पहचान, शालीनता और सुरक्षा इस्लाम
    • एहतेशाम हुदवी
    • Dec 26, 2025

    हिजाब का उद्देश्य: पहचान, शालीनता और सुरक्षा

    हिजाब—जो अरबी मूल ḥ-j-b से निकला शब्द है—का मूल अर्थ है “ढकना (to cover), रोकना (to shield), या अलग करना (to separate)”। लेकिन इस सरल अर्थ के भीतर एक अत्यंत गहरा आध्यात्मिक और सामाजिक दर्शन छुपा हुआ है। हिजाब केवल सिर पर ओढ़ी जाने वाली चादर नहीं; यह एक ऐसी जीवन-शैली (lifestyle) है जो

  • औरंगज़ेब आलमगीर: एक पारंपरिक मुस्लिम नज़रिए में न्यायप्रिय, धार्मिक और प्रभावी शासक व्यक्तित्व
    • एहतेशाम हुदवी
    • Nov 28, 2025

    औरंगज़ेब आलमगीर: एक पारंपरिक मुस्लिम नज़रिए में न्यायप्रिय,...

    पारंपरिक इस्लामी विद्वानों और पुराने मुस्लिम इतिहासकारों की नज़र से देखा जाए, तो औरंगज़ेब आलमगीर (1058–1118 हिजरी / 1658–1707 ई.) को किसी “विवादित तानाशाह” के रूप में नहीं, बल्कि भारत के सबसे धार्मिक, न्यायप्रिय और काबिल शासकों में माना जाता है।

  • आधुनिक विज्ञानों के आविष्कार और विकास में मुसलमानों की भूमिका इस्लाम
    • एहतेशाम हुदवी
    • Nov 26, 2025

    आधुनिक विज्ञानों के आविष्कार और विकास में मुसलमानों की...

    दुनिया में बहुत सारे धर्म और मज़हब हैं, और हर दिन नए-नए विचार और समूह बनते रहते हैं। हर धर्म में अलग-अलग सोच और मानने वाले लोग मिलते हैं। लेकिन इन सबके बीच, इस्लाम एक ऐसा शांत और सभ्य धर्म है जिसने ज्ञान और विद्वानों की अहमियत लोगों के दिलों में गहराई से बैठा दी है।

  • इस्लामी खान-पान के नियम: हलाल और हराम खाद्य पदार्थ शरीयत
    • एहतेशाम हुदवी
    • Oct 7, 2025

    इस्लामी खान-पान के नियम: हलाल और हराम खाद्य पदार्थ

    इस्लाम में खान-पान के नियम, यानी हलाल और हराम खाद्य पदार्थों के बारे में सख्त हिदायतें दी गई हैं। ये नियम न केवल इंसान की शारीरिक सेहत के लिए हैं, बल्कि उसकी रूहानी और नैतिक जिंदगी को भी बेहतर बनाते हैं। हलाल का मतलब है वह खाना जो इस्लाम के मुताबिक जायज और साफ है, जबकि हराम वह है जो नाजायज और नापाक...

  • इस्लामऑनवेब का हिन्दी संस्करण लॉन्च उभरते मुद्दे
    • एहतेशाम हुदवी
    • Sep 11, 2025

    इस्लामऑनवेब का हिन्दी संस्करण लॉन्च

    किशनगंज में मिलाद कॉन्फ़्रेंस के दौरान इस्लामऑनवेब का हिन्दी संस्करण लॉन्च

  • शरिया के स्रोत: कुरआन, सुन्नत, इज्मा और कियास शरीयत
    • एहतेशाम हुदवी
    • Sep 3, 2025

    शरिया के स्रोत: कुरआन, सुन्नत, इज्मा और कियास

    शरिया इस्लाम का वह कानून है जो मुसलमानों की जिंदगी को अल्लाह की मरजी के मुताबिक चलाने का रास्ता दिखाता है। यह न केवल इबादत, बल्कि रोजमर्रा के कामों, जैसे परिवार, व्यापार और समाज के नियमों को भी तय करता है। शरिया के चार मुख्य स्रोत हैं: कुरआन, सुन्नत, इज्मा (सहमति), और कियास (अनुमान)।

  • तौहीद: इस्लाम का मूल सिद्धांत अल्लाह
    • एहतेशाम हुदवी
    • Sep 2, 2025

    तौहीद: इस्लाम का मूल सिद्धांत

    तौहीद इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी सिद्धांत है, जिसका अर्थ है एकेश्वरवाद, यानी केवल एक अल्लाह पर विश्वास करना। यह विश्वास इस्लाम की नींव है और हर मुसलमान के लिए अनिवार्य है। तौहीद को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है: तौहीद अर-रुबूबिय्या (रब की एकता), तौहीद अल-उलूहिय्या (इबादत की एकता),...

  • हिजरा: मदीना की ओर हिजरत और इसकी अहमियत रसूल (ﷺ)
    • एहतेशाम हुदवी
    • Aug 15, 2025

    हिजरा: मदीना की ओर हिजरत और इसकी अहमियत

    हिजरा, यानी पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके साथियों की मक्का से मदीना की ओर हिजरत, इस्लामिक इतिहास की सबसे अहम घटनाओं में से एक है। 622 ई. में हुई यह हिजरत न सिर्फ़ एक भौगोलिक बदलाव था, बल्कि इस्लाम के प्रसार और एक मज़बूत मुस्लिम समाज की नींव रखने का शुरुआती बिंदु था।

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    • एहतेशाम हुदवी
    • Oct 7, 2025

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