नासिक टीसीएस केस: मुसलमानों को कैसे बिना वजह निशाना बनाया जा रहा है
भारत में मुसलमानों के खिलाफ साजिशें अब नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। नौकरियों में तो पहले से भेदभाव चल रहा था, जहां मुसलमानों को मजहब की बुनियाद पर जॉब से महरूम किया जाता है। अब प्राइवेट कंपनियों, खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों में भी उन्हें रोजगार से बाहर करने की खतरनाक प्लानिंग की जा रही है। महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का मामला इसका सबसे ताजा और खुला उदाहरण है। मीडिया ने इसे “कॉर्पोरेट जिहाद” का नाम दे दिया। कहा गया कि मुसलमान एचआर (HR) और कर्मचारी मिलकर हिंदू लड़कियों और लड़कों को जबरन नमाज पढ़ाने, गाय का गोश्त खिलाने, रोजा रखने और इस्लाम कबूल कराने पर मजबूर कर रहे थे। पूरे देश में इस्लामोफोबिया (Islamophobia) फैलाया गया। लेकिन असलियत कुछ और ही है। ये पूरा मामला एक पर्सनल अफेयर (Personal Affair) से शुरू हुआ, जिसे बजरंग दल (Bajrang Dal), कुछ शिद्दतपसंद ताकतें (Extremist Right Wings) और गोदी मीडिया ने मुसलमानों के खिलाफ बड़ा हथियार बना लिया।
ये केस सिर्फ नासिक का नहीं, पूरे देश के मुसलमानों पर हमला है। हमें माशी तौर पर कमजोर करना है, समाजी तौर पर अलग-थलग करना है और सियासी तौर पर बेबस बनाना है। इस लेख में हम सारी डिटेल्स बताएंगे कि केस की असल सच्चाई क्या है, मीडिया ने कैसे झूठ फैलाया, निदा शेख पर लगे आरोप कितने बेबुनियाद हैं और मुसलमानों को बिना वजह क्यों टारगेट किया जा रहा है। सच्चाई सामने आने के बाद भी प्रोपगेंडा जारी है, लेकिन हम तथ्यों के साथ खड़े हैं। अल्लाह की मदद से हम इस साजिश को बेनकाब करेंगे।
मामला कैसे शुरू हुआ और बजरंग दल की साजिश का खेल
नासिक की टीसीएस (TCS)कंपनी में दानिश शेख नाम का एक मुसलमान नौजवान काम कर रहा था। वो शादीशुदा था, लेकिन स्कूल-कॉलेज के जमाने से उसकी एक हिंदू लड़की से दोस्ती थी। 2022 में दोनों की दोबारा मुलाकात हुई। लड़की ने कहा कि मुझे भी जॉब लगवा दो। दानिश सीनियर पोजीशन पर था, उसने सिफारिश की और लड़की को जॉब मिल गई। धीरे-धीरे दोनों का अफेयर शुरू हो गया। दोनों घरवालों से छुपाकर रिलेशनशिप में थे। लड़की ने दानिश से शादी करने का फैसला किया, लेकिन दानिश ने साफ कहा – मैं शादीशुदा हूं, अभी शादी नहीं कर सकता। लड़की ने कहा, मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगी।
जब लड़की के घरवालों को पता चला तो उन्होंने देखा कि लड़की इस्लाम और मुसलमानों के बारे में ज्यादा बात कर रही है, रोजा रख रही है। घरवाले नाराज हुए। फिर खबर बजरंग दल (Bajran Dal) तक पहुंच गई। बजरंग दल का पूरा ग्रुप ऐसे मामलों पर नजर रखता है जहां मुसलमान लड़का और हिंदू लड़की साथ नजर आएं। वे इसे तुरंत “लव जिहाद” (Love Jihad) करार दे देते हैं। बजरंग दल ने लड़की से मुलाकात की, उसे मुसलमानों के खिलाफ भड़काया और कहा – दानिश के खिलाफ केस दर्ज करो।
26 मार्च को पहली एफआईआर (FIR) दर्ज हुई। उसमें मुख्य इल्जाम था कि दानिश ने शादी का वादा किया लेकिन फिर शर्त रखी कि तुम इस्लाम कबूल करो, तब ही शादी होगी। एफआईआर में दानिश के कुछ दोस्तों का नाम भी लिया गया। लेकिन मामला यहीं नहीं थमा। कंपनी की और लड़कियों और स्टाफ ने भी दानिश, निदा शेख और दूसरे मुसलमानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दीं। कुल नौ एफआईआर हो गईं। पहली एफआईआर में तब्दीली मजहब या नमाज-गोश्त का ज्यादा तज़किरा नहीं था, लेकिन बाद की एफआईआर में इल्जाम बढ़ते गए – जैसे के मुसलमान लड़के-लड़कियां हिंदू कर्मचारियों को नमाज पढ़ने पर मजबूर कर रहे थे, गाय का गोश्त खिला रहे थे, इस्लाम की तबलीग कर रहे थे।
आठ लोगों को मुख्य मुलजिम (Main Accused) बनाया गया। उनमें निदा शेख (जिसे मास्टरमाइंड बताया गया), दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, दानिश, शाहरुख शेख, रजा मेमन आदि शामिल थे। पुलिस ने छह की गिरफ्तारी की, दो की तलाश जारी थी। महाराष्ट्र ATS इस केस की निगरानी कर रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को सख्त एक्शन का हुक्म दिया। नीतीश राणे ने इसे “कॉर्पोरेट जिहाद” (Corporate Jihad) करार दिया और कहा कि मुसलमानों को ऐसी कंपनियों में जॉब नहीं मिलनी चाहिए।
लेकिन सच्चाई ये है कि ये आपसी दुश्मनी और पर्सनल अफेयर का मामला था। दानिश ने शादी करने से इंकार कर दिया तो बदला लेने के लिए एफआईआर हुई। बजरंग दल ने प्लानिंग की, लड़की को तैयार किया और फिर और लड़कियों का ब्रेनवॉश (Brainwash) करके मुसलमानों के खिलाफ भड़काया। वकील बाबा सैयद ने कोर्ट में पहली सुनवाई में ही कहा – ये साजिश लगती है। पहली एफआईआर में तब्दीली मजहब (Conversion) का तज़किरा नहीं था, बाद की एफआईआर में बढ़ा-चढ़ाकर इल्जाम लगाए गए। पूरी गहराई से तफ्तीश (Investigation) होनी चाहिए।
मुसलमानों का एक तबका भी मीडिया से प्रभावित हो गया। कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने बिना सच्चाई जाने कहा – की “मुसलमानों की क्या जरूरत थी तबलीग की? जॉब पर फोकस करना था। लेकिन अब सच्चाई सामने है कि ये फर्जी स्क्रिप्ट थी।
गोदी मीडिया का झूठा प्रोपगेंडा और मुसलमानों को बदनाम करने की खतरनाक साजिश
मीडिया ने इस केस को हवा दी। आज तक (Aaj Tak), न्यूज 18 (News18) , एबीपी न्यूज (ABP News), रिपब्लिक भारत (Republic Bharat), न्यूज नेशन (News Nation) , डीडी न्यूज (DD News) – सबने निदा शेख को “धर्मांतरण की मास्टरमाइंड” और “दबंग मैम” बता दिया। अंजना ओम कश्यप ने कहा – “धर्मांतरण की दबंग मैम फरार”। सुधीर चौधरी ने “व्हाइट कॉलर आतंक” कहा। अमन चोपड़ा ने पूछा – “क्या आरोपी गाजी बनना चाहते थे?” कुछ चैनलों ने इसे दिल्ली ब्लास्ट से जोड़ दिया। कहा गया कि निदा खान एचआर मैनेजर थी, हिंदू लड़कियों को जॉब देती थी, सैलरी बढ़ाती थी, ज्यादा छुट्टियां देती थी और बदले में इस्लाम कबूल कराती थी, गाय का गोश्त खिलाती थी, नमाज पढ़ने को कहती थी।
पूरे चार साल से कंपनी में यौन शोषण और धर्मांतरण का गंदा खेल चल रहा था, ऐसा प्रोपगेंडा फैलाया गया। टीसीएस को भी बयान देना पड़ा कि कंपनी ऐसे किसी मुलाजिम को बर्दाश्त नहीं करेगी जो रूल्स के खिलाफ काम करे। कंपनी ने आरोपियों को सस्पेंड कर दिया।
लेकिन ये सब फर्जी था। टीसीएस को भी बयान देना पड़ा कि निदा शेख एचआर मैनेजर (HR Manager) ही नहीं थी। वो सिर्फ टेलीकॉलर (Tele caller) थी – यानी फोन पर क्लाइंट्स को स्कीम बताने का काम। उसकी उम्र सिर्फ 25 साल थी। वो कंपनी में अहम ओहदे पर नहीं थी। रिक्रूटमेंट, सैलरी बढ़ाने या किसी पर प्रेशर बनाने का उसका कोई अधिकार नहीं था। वो कई महीनों से ऑफिस नहीं गई थी क्योंकि वो प्रेग्नेंट थी और मुंबई में मां-बाप के घर मैटरनिटी लीव पर थी। पुलिस उसके घर तक पहुंची तक नहीं। वो फरार नहीं थी। निदा के वकील बाबा सैयद ने कहा – हम हाई कोर्ट में एंटीसिपेटरी बेल (Anticipatory Bail) की पिटीशन दायर कर रहे हैं। जिन्होंने निदा को बदनाम किया, उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया जाएगा।
टीसीएस ने आधिकारिक स्टेटमेंट जारी किया। कहा कि निदा शेख प्रोसेस एसोसिएट थी, लीडरशिप की कोई जिम्मेदारी नहीं थी। कंपनी की POSH कमेटी ( Prevention of Sexual Harassment at Workplace) या एथिक्स कमेटी (Ethics Committee) में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) या जबरन धर्मांतरण (Forced Conversion) की कोई आंतरिक कंप्लेंट नहीं आई। कंपनी ने Deloitte और Trilegal जैसी बड़ी कंपनियों को इंटरनल जांच के लिए हायर किया। ओवरसाइट कमेटी बनाई गई, जिसमें केकी मिस्त्री शामिल हैं।
आरफा खानम शेरवानी ने कहा “ये एक लड़की का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर (Extra-marital Affair) था जो खराब हो गया। बदले में मुसलमानों को फंसाया गया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट भी यही बताती है। लड़कियां एडल्ट थीं (24-25 साल से ऊपर), नाबालिग नहीं। अगर जबरन नमाज पढ़ने या गोश्त खिलाने की बात होती तो उन्होंने पहले मां-बाप, दोस्तों, मैनेजर या पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की? क्यों अचानक नौ एफआईआर आईं? क्यों बजरंग दल के आने के बाद ही सब कुछ हुआ”?
मीडिया ने निदा की तस्वीर चलाई, उसे आतंकवादी बता दिया। उसके परिवार की इज्जत लुट गई। लेकिन सच्चाई ये है कि निदा कई महीने से ऑफिस नहीं थी। कंपनी को पता था कि वो मैटरनिटी लीव पर है। फिर भी “फरार” का झूठ फैलाया गया।
ये प्रोपगेंडा मुसलमानों को प्राइवेट जॉब से बाहर करने का था। सरकारी जॉब में तो भेदभाव पहले से है। प्राइवेट में टैलेंट की वजह से मुसलमान काम कर रहे थे। लेकिन अब मैसेज दिया जा रहा है कि मुसलमान ऑफिस में भी तबलीग करते हैं, लड़कियों को जबरन मुसलमान बनाते हैं। नतीजा? कंपनियां मुसलमानों को जॉब देने से डरेंगी। मुसलमानों को माशी (Economically) तौर पर कमजोर करना है – यही मंसूबा है।
टीसीएस का स्टेटमेंट, निदा की असलियत और फर्जी आरोपों का पर्दाफाश
टीसीएस ने साफ कहा – हमारी नासिक यूनिट पूरी तरह ऑपरेट कर रही है। क्लाइंट्स को सर्विस दी जा रही है। प्रेस में छपी खबरें झूठ हैं। निदा शेख पर कोई लीडरशिप रोल नहीं था। कोई कंप्लेंट POSH या एथिक्स कमेटी को नहीं मिली। कंपनी ने इंटरनल इन्वेस्टिगेशन शुरू किया, रिपोर्ट ओवरसाइट कमेटी को सौंपी जाएगी।
निदा शेख के वकील ने कहा – निदा वहां टेलीकॉलर थी, असिस्टेंट थी। सीनियर के साथ काम करती थी। वो नासिक में नहीं, मुंबई में मां-बाप के घर प्रेग्नेंट हालत में है। पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं की, घर पर पहुंचा तक नहीं।
अब सवाल ये हैं: अगर सच में जबरन नमाज या गोश्त की बात होती तो लड़कियों ने पहले शिकायत क्यों नहीं की? ऑफिस में मैनेजर, ऑपरेशन मैनेजर, POSH कमेटी सब थे। सोशल मीडिया पर क्यों नहीं लिखा? पुलिस में क्यों नहीं गए? ये सब एडल्ट थे, कोई मजबूर नहीं कर सकता। अगर दानिश ने गाय का गोश्त खिलाया तो उन्होंने खाया क्यों? क्यों इस्लाम कबूल किया?
ये सवालों का जवाब साफ है – क्योंकि ये सब फर्जी था। बजरंग दल ने प्लानिंग की, लड़कियों को उकसाया। पहली एफआईआर में कम तस्करा था, बाद में इल्जाम बढ़ाए गए। कोर्ट में वकील ने कहा – ये आपसी लड़ाई को तब्दीली मजहब का उनवान दे दिया गया।
मुसलमानों को माशी तौर पर कमजोर करने की बड़ी साजिश और दोहरे मापदंड
ये केस मुसलमानों को अनएम्प्लॉयेबल (Unemployable) बनाने की साजिश (Conspiracy) है। पहले लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद, UPSC जिहाद – अब कॉर्पोरेट जिहाद (Corporate Jihad)। मुसलमान सुबह उठकर सिर्फ जिहाद नहीं करता, वो काम करता है, परिवार चलाता है। लेकिन कुछ लोग चाहते हैं कि मुसलमान कॉरपोरेट जॉब से बाहर हो जाएं।
“इसी नासिक में अशोक नाम का एक बाबा (पूर्व नेवी कैप्टन) था। उसने 1000 से ज्यादा हिंदू महिलाओं – कमिश्नर की बेटी, मिनिस्टर की बीवी – के साथ गंदी हरकतें कीं। नशा देकर, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। लेकिन बजरंग दल ने कोई प्रोटेस्ट नहीं किया। मीडिया ने खबर दबा दी। वीडियो वायरल होने पर प्रशासन ने डिलीट कराने की कोशिश की। कोई फांसी की सजा की बात नहीं। लेकिन मुसलमानों का नाम आते ही पूरा देश उबल पड़ा”।
ये दोहरा मापदंड दिखाता है के सिर्फ मुसलमानों पर सिलेक्टिव आउट्रेज किया जाएगा, और दूसरे करेंगे तो वो गलत होने के बावजूद कुछ भी उनके खिलाफ नहीं होगा, और मुसलमानो को ज़बरदस्ती फंसाने की कोशिश की जायेगी। सीनियर पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने कहा “मुसलमान कोई संगठित साजिश नहीं करता। एक इंडिविजुअल गलती कर सकता है, लेकिन पूरे समुदाय को टारगेट करना गलत है”।
महिलाओं की सुरक्षा की बात करने वाली सरकार मणिपुर, उन्नाव, हाथरस में चुप क्यों? लेकिन नासिक में मुसलमान महिला पर झूठा केस बनाने में तेजी क्यों?
मुसलमानों को कमजोर करने का प्लान कामयाब नहीं होगा। टीसीएस जांच कर रही है। ATS भी देख रही है। लेकिन हमें इंसाफ चाहिए। गोदी मीडिया पर जुर्माना लगे, झूठे प्रोपगेंडा करने वालों पर केस हो। निदा शेख जैसी मासूम प्रेग्नेंट लड़की की जिंदगी तबाह कर दी गई। उसके बच्चे का क्या होगा?
मुसलमान भाई-बहन, हमें जागना होगा। सोशल मीडिया पर बिना सच्चाई जाने कुछ मुसलमान भी मुसलमानों को गलत ठहरा रहे थे। अब सच्चाई सामने है। ये हम सब पर हमला है। एकजुट रहो, सच्चाई की आवाज उठाओ।
टीसीएस केस मुसलमानों के खिलाफ एक और साजिश है। एक पर्सनल अफेयर को पूरे समुदाय पर हमला बनाने की कोशिश। लेकिन तथ्य सामने आ चुके हैं – निदा एचआर नहीं थी, कोई रैकेट नहीं था, कोई जबरन तबलीग नहीं थी।
मुसलमान इस देश के बराबर नागरिक हैं। उन्हें जॉब का, इज्जत का, इंसाफ का हक है। हम इंसाफ मांगते हैं। अल्लाह हम सबकी हिफाजत करे। इस्लाम ऑन वेब जैसी आवाजें सच्चाई दिखाती रहेंगी।
संदर्भ:
- मिल्लत टाइम्स
- अरफ़ा खानम शेरवानी
- The Print
लेखक:
एहतेशाम हुदवी, लेक्चरर, क़ुर्तुबा इंस्टीटयूट, किशनगंज, बिहार
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