गाजा के बच्चे: इजराइली युद्ध अपराधों की इंसानी कीमत

यह इन्फोग्राफिक सीरीज़ 7 अक्तूबर 2023 के बाद फ़िलिस्तीनी बच्चों पर इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों के असर से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच आयोग (UN Independent International Commission of Inquiry) की रिपोर्ट के अहम नतीजों को सामने लाती है।

अहम आँकड़ों और दर्ज किए गए सबूतों के ज़रिए यह सीरीज़ दिखाती है कि ग़ज़ा और क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी इलाक़ों के बच्चों को किस तरह अपनी जान गंवानी पड़ी, वे ज़ख़्मी हुए, अपने घरों से बेघर हुए, हिरासत में लिए गए, भूख का सामना किया, उनकी तालीम बुरी तरह प्रभावित हुई, उन्हें गहरे मानसिक सदमे झेलने पड़े और उनके बचपन की हिफ़ाज़त करने वाली बुनियादी व्यवस्थाएँ तबाह हो गईं।

यह सीरीज़ हमें यह याद दिलाती है कि इन आँकड़ों को सिर्फ़ गिनती या नंबर न समझें, बल्कि इनके पीछे बिखरी हुई ज़िंदगियाँ, छिन चुके भविष्य और इंसाफ़ की पुकार को भी देखें।

1 – फ़िलिस्तीनी बचपन निशाने पर

रिपोर्ट के मुताबिक़, 7 अक्तूबर 2023 से 7 अक्तूबर 2025 के बीच ग़ज़ा में फ़िलिस्तीनी बच्चों को भारी तबाही का सामना करना पड़ा।

इस दौरान कम से कम 20,179 बच्चों की जान गई, जबकि 44,143 बच्चे ज़ख़्मी हुए

मारे गए लोगों में 30% बच्चे थे, और ज़ख़्मी होने वालों में 26% बच्चे शामिल थे।

जाँच आयोग का कहना है कि असल संख्या इससे भी ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि कई मामलों का पूरा रिकॉर्ड अब तक सामने नहीं आ सका है।

2 – सबसे छोटे बच्चे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे छोटे बच्चे इस तबाही से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए।

कम से कम 5,031 ऐसे बच्चों की जान गई जिनकी उम्र पाँच साल से कम थी। इनमें एक साल से कम उम्र के 1,029 मासूम बच्चे और लगभग 420 नवजात (जन्मे हुए) बच्चे भी शामिल थे।

इसके अलावा, अनुमान है कि लगभग 5,160 बच्चे इमारतों के मलबे के नीचे दब गए, जिनमें से कई की मौत हो गई या वे अब तक लापता हैं।

3 – धमाकों, मलबे और उम्र भर के ज़ख़्म

रिपोर्ट के मुताबिक़, घनी आबादी वाले इलाक़ों में बड़े पैमाने पर विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल की वजह से बड़ी संख्या में बच्चे मारे गए या ज़ख़्मी हुए।

रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि धमाका होने वाले बम और दूसरे विस्फोटक सामान आज भी लोगों, ख़ासकर बच्चों, के लिए लगातार ख़तरा बने हुए हैं। ग़ज़ा में कम से कम 6.1 करोड़ टन मलबा अब भी फैला हुआ है।

इसके अलावा, कम से कम 21,000 बच्चे ऐसे हैं जो इस संघर्ष के दौरान नई शारीरिक विकलांगता का शिकार हुए, और अब उन्हें पूरी ज़िंदगी उसके असर के साथ जीना होगा।

4 – सीधे निशाना बनाकर गोलीबारी और युद्धविराम (Ceasefire) के बाद भी बच्चों की मौत

रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों को उस समय भी गोली मारी गई जब वे अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगह जा रहे थे, राहत शिविरों (relief camp) में पनाह लिए हुए थे, खाना लेने जा रहे थे या युद्धविराम के बाद तय की गई सीमावर्ती जगहों के पास मौजूद थे।

जाँच आयोग को 168 बच्चों के गोली लगने की जानकारी मिली, जिनमें कम से कम 88 बच्चों की जान चली गई।

रिपोर्ट के मुताबिक़, कम से कम 70 बच्चों को क्वाडकॉप्टर (drones) से गोली मारी गई, जबकि कम से कम 20 बच्चों को स्नाइपर (दूर से निशाना लगाने वाले सैनिक) ने गोली मारी।

5 – वेस्ट बैंक में बच्चों की मौत और बसने वालों की बढ़ती हिंसा

रिपोर्ट के मुताबिक़, 7 अक्तूबर 2023 से 20 अक्तूबर 2025 के बीच वेस्ट बैंक, जिसमें पूर्वी यरूशलम भी शामिल है, में इज़राइली सुरक्षा बलों ने 213 फ़िलिस्तीनी बच्चों की जान ली।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इज़राइली बसने वालों (Settlers) की हिंसा में तेज़ बढ़ोतरी हुई। साल 2025 के पहले छह महीनों में 230 फ़िलिस्तीनी बस्तियों और इलाक़ों में 1,000 से ज़्यादा हमले दर्ज किए गए।

6 – हिरासत में फ़िलिस्तीनी बच्चे

रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में की गई गिरफ्तारियों के दौरान फ़िलिस्तीनी बच्चे भी हिरासत में लिए गए। ग़ज़ा से हिरासत में लिए गए बच्चों की सटीक संख्या और वे कहाँ रखे गए हैं, इसकी जानकारी अब तक स्पष्ट नहीं है।

वेस्ट बैंक में अक्तूबर 2023 से अब तक 1,655 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी बच्चों को हिरासत में लिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक़, दिसंबर 2025 तक इज़राइल प्रिजन सर्विस (IPS) की जेलों में बंद 351 फ़िलिस्तीनी बच्चों में से 51% को प्रशासनिक हिरासत (Administrative Detention) के तहत रखा गया था। यानी उन्हें बिना मुक़दमा चलाए या औपचारिक आरोप तय किए लंबे समय तक हिरासत में रखा गया।

7 – नवजात बच्चों की देखभाल पर गहरा असर

रिपोर्ट के मुताबिक़, अस्पतालों पर हमलों और ज़रूरी सामान की आपूर्ति में रुकावट की वजह से ग़ज़ा में नवजात बच्चों की देखभाल बुरी तरह प्रभावित हुई।

उत्तरी ग़ज़ा के नवजात शिशु वार्ड (Neonatal Units) के नष्ट हो जाने के बाद इन्क्यूबेटरों (Incubators) की संख्या 178 से घटकर सिर्फ़ 54 रह गई।

नवजात बच्चों के लिए उपलब्ध बिस्तरों की क्षमता भी 50% कम हो गई।

इसके अलावा, मार्च 2026 तक 70% नवजात बच्चों को समय से पहले जन्मे (Premature) या कम वज़न वाले (Underweight) के रूप में दर्ज किया गया, जो वहाँ के गंभीर हालात को दिखाता है।

8 – शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बिखर गई

रिपोर्ट के मुताबिक़, ग़ज़ा की शिक्षा व्यवस्था लगभग पूरी तरह तबाह हो गई।

अक्तूबर 2025 तक 564 में से 459 स्कूलों की इमारतें सीधे हमलों का शिकार हुईं, जिससे लगभग 4,97,712 छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई।

इसके अलावा, नवंबर 2025 तक ग़ज़ा के 95% विश्वविद्यालय परिसरों (University Campuses) पर भी इस संघर्ष का असर पड़ चुका था, जिससे उच्च शिक्षा भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई।

9 – अनाथ, बिछड़े हुए और अकेले रह गए बच्चे

रिपोर्ट के मुताबिक़, परिवारों और बच्चों की हिफ़ाज़त करने वाली व्यवस्था बुरी तरह टूट गई।

7 अक्तूबर 2023 से 7 अक्तूबर 2025 के बीच अनुमानित 58,554 बच्चों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को खो दिया।

इसके अलावा, लगभग 17,000 से 18,000 बच्चे ऐसे थे जो अपने माता-पिता से बिछड़ गए थे या उनके साथ कोई बड़ा देखभाल करने वाला मौजूद नहीं था। ऐसे कई बच्चों को अकेले और बेहद मुश्किल हालात में जीवन बिताना पड़ा।

10 – घेराबंदी, भूख और बच्चों पर मानसिक असर

रिपोर्ट के मुताबिक़, बार-बार बेघर होना, घेराबंदी, खाने और साफ़ पानी की कमी, और लगातार डर सदमे ने बच्चों की ज़िंदगी पर गहरा और लंबे समय तक रहने वाला असर डाला।

रिपोर्ट के अनुसार, ग़ज़ा के भीतर कम से कम 19 लाख लोगों को ज़बरदस्ती अपने घर छोड़कर दूसरी जगह जाने पर मजबूर होना पड़ा।

साल 2025 में लगभग 95,000 बच्चों में गंभीर कुपोषण (Acute Malnutrition) पाया गया।

इसके अलावा, ग़ज़ा के लगभग सभी 12 लाख बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहायता (Mental Health & Psychosocial Support) की ज़रूरत बताई गई, ताकि वे इस संघर्ष से हुए मानसिक और भावनात्मक सदमे से उबर सकें।

11 – रिपोर्ट का निष्कर्ष क्या है?

रिपोर्ट के अनुसार, फ़िलिस्तीनी बच्चों को पहुँची इस भारी तबाही को केवल युद्ध का एक अनजाना नतीजा नहीं माना जा सकता।

जाँच आयोग का कहना है कि उसके पास ऐसे उचित आधार (reasonable grounds) हैं जिनके आधार पर वह यह निष्कर्ष निकालता है कि इज़राइली अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने ग़ज़ा में जनसंहार (Genocide), मानवता के ख़िलाफ़ अपराध (Crimes Against Humanity) और युद्ध अपराध (War Crimes) जारी रखे, जबकि वेस्ट बैंक में भी युद्ध अपराध किए गए।

रिपोर्ट में यह भी अपील की गई है कि:

  • बच्चों और आम नागरिकों पर हमले तुरंत रोके जाएँ,
  • पीड़ितों को उचित मुआवज़ा (Reparations) दिया जाए,
  • ज़िम्मेदार लोगों को क़ानून के दायरे में लाया जाए (Accountability),
  • और ऐसा न्याय सुनिश्चित किया जाए जो बच्चों की ज़रूरतों और उनके अधिकारों का ख़ास ख़याल रखे (Child-responsive Justice)


By: Web Desk

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