इसरा और मिराज: पैगंबर मुहम्मद ﷺ के महान चमत्कार

हर साल 27 रजब की रात मुसलमान शब--मिराज (Shab-e-Miraj) या इसरा मिराज (Al-Isrā wal-Mi‘rāj) की याद मनाते हैं। यह एक बहुत ही विशेष और बरकत वाली रात है, जब अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद को एक अद्भुत और चमत्कारी यात्रा कराई।

इस महान घटना में नबी ﷺ को मक्का से यरुशलम (Jerusalem) स्थित मस्जिद--अक़्सा (Masjid al-Aqsa) तक ले जाया गया, और फिर वहाँ से उन्हें सात आसमानों तक बुलाया गया। यह घटना हिजरत से लगभग एक वर्ष पहले हुई थी। इस घटना का उल्लेख लगभग 25 सहाबा की रिवायतों में मिलता है।

इस सफर में हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम नबी ﷺ के साथ थे। वे नबी ﷺ को एक विशेष सवारी बुराक (Burāq) पर बैठाकर मस्जिद--हराम (Masjid al-Haram) से मस्जिद--अक़्सा तक ले गए। वहाँ नबी ﷺ की मुलाकात कई महान पैगंबरों (Prophets) से हुई और उन्होंने उनकी इमामत में नमाज़ पढ़ाई।

इसके बाद नबी ﷺ को मिराज के द्वारा एक-एक करके आसमानों की सैर कराई गई। अंत में वे उस सबसे ऊँचे स्थान तक पहुँचे जहाँ अल्लाह तआला की विशेष हाज़िरी हुई। वहाँ नबी ﷺ को कई अहम हिदायतें दी गईं, जिनमें नमाज़ की फ़र्ज़ियत सबसे महत्वपूर्ण है। इसी सफर में नबी ﷺ को जन्नत और जहन्नम के दृश्य भी दिखाए गए।

इसरा  (Night travel) का अर्थ है रात की यात्रा, यानी मक्का से बैतुल मुक़द्दस (मस्जिद-ए-अक़्सा) तक का सफर। मिराज  (Ascension to heaven)का अर्थ है ऊपर चढ़ना, यानी आसमानों की ओर उठाया जाना।

यह पूरी घटना नबी ﷺ की ज़िंदगी का सबसे बड़ा चमत्कार (miracle) मानी जाती है और मुसलमानों के ईमान व अकीदे को मज़बूती देती है।

 

मक्का से यरुशलम की दूरी और सफर का समय (The distance and travel time from Mecca to Jerusalem)

मक्का और यरुशलम के बीच हवाई दूरी करीब 1239 किलोमीटर है। उस समय ऊंटों से यह सफर 30-40 दिन का होता था। लेकिन पैगंबर ﷺ ने बुराक पर यह दूरी एक रात के बहुत छोटे हिस्से में तय की। पूरी घटना रात में हुई और सुबह से पहले मक्का लौट आए। बुराक की रफ्तार इतनी तेज थी कि हर कदम नजर की आखिरी हद तक पहुंचता था।

आधुनिक समय में भी इस दूरी को पार करना मुश्किल है। यहां एक तुलना दी जा रही है:

परिवहन का तरीका

मील/घंटा

समय

इंसान (पैदल)

5

13 दिन

तेज घोड़ा

40

39 घंटे

सबसे तेज ट्रेन

186

8.3 घंटे

रेस कार

250

6.2 घंटे

जेट एयरलाइन

530

2.9 घंटे

कॉनकॉर्ड जेट

1550

60 मिनट

फाइटर जेट

2000

46 मिनट

स्पेस शटल

17500

5.3 मिनट

रॉकेट

25000

3.7 मिनट

रोशनी की रफ्तार (speed of light)

670 मिलियन

8.3 मिलीसेकंड

यह सफर जिस्मानी था, सिर्फ रूहानी नहीं। पैगंबर ﷺ ने वापसी पर कारवां का हाल बताया, जिसे कुरैश ने जांचकर सच्चाई मान ली।

कुरान में इसरा और मिराज के सबूत (Evidence of Isra and Mi'raj in the Quran)

इसरा और मिराज की घटना कुरान में दो जगहों पर स्पष्ट रूप से जिक्र हुई है।

  1. सूरह अल-इसरा की पहली आयत:

سُبْحَانَ الَّذِي أَسْرَىٰ بِعَبْدِهِ لَيْلًا مِّنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ إِلَى الْمَسْجِدِ الْأَقْصَى الَّذِي بَارَكْنَا حَوْلَهُ لِنُرِيَهُ مِنْ آيَاتِنَا ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ

पाक और बरकत वाली है वह हस्ती जिसने अपने बंदे को रात के एक हिस्से में मस्जिद--हराम से मस्जिद--अकसा तक सफर करायाजिसके आसपास हमने बरकतें दी हैंताकि हम उसे अपनी कुछ बड़ी निशानियां दिखाएं। बेशक वही सब कुछ सुनने और देखने वाला है।(सूरह अल-इसरा: 1)

यह आयत स्पष्ट रूप से इसरा (मक्का से यरुशलम तक का रात का सफर) का जिक्र करती है। अल्लाह ने पैगंबर मुहम्मद ﷺ को “अब्द” (बंदा) कहकर सम्मान दिया और सफर को अपनी कुदरत की निशानी बताया।

  1. सूरह अन-नज्म, आयत 13 से 18:

وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ ۝ عِنْدَ سِدْرَةِ الْمُنْتَهَىٰ ۝ عِنْدَهَا جَنَّةُ الْمَأْوَىٰ ۝ إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ ۝ مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ ۝ لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَىٰ

और निश्चय ही उन्होंने उसे दूसरी बार भी देखा, सिदरतुल-मुन्तहा के पास, जिसके पास ठहरने की जन्नत (जन्नतुल-मअवा) है, जब उस सिदर के वृक्ष पर वह छाया छा रही थी जो छा रही थी। तो नज़र डगमगाई और ही सीमा से आगे बढ़ी। निश्चय ही उन्होंने अपने रब की महान निशानियों को देखा। (सूरह अन-नज्म)

ये आयतें मिराज (आसमानों की सैर और सिदरतुल मुंतहा तक पहुंचने) की तरफ इशारा करती हैं। पैगंबर ﷺ की नजर कभी गलत नहीं हुई और उन्होंने अल्लाह की सबसे बड़ी निशानियां देखीं। इस तरह कुरान इसरा और मिराज दोनों को अल्लाह की कुदरत का मुजिजा बताता है।

हदीसों में इसरा और मिराज का वर्णन (विस्तृत व्याख्या)

इसरा और मिराज की घटना का सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत वर्णन हमें हदीसों में मिलता है। खास तौर पर यह घटना सहीह बुखारी (Sahih Bukhari) और सहीह मुस्लिम (Sahih Muslim) में बयान की गई है। इन हदीसों में बताया गया है कि किस तरह अल्लाह के हुक्म से नबी हज़रत मुहम्मद को रात के सफर (night journey) पर ले जाया गया और फिर उन्हें आसमानों की यात्रा (heavenly journey) कराई गई। इन दोनों किताबों को इस्लाम में सबसे प्रामाणिक (authentic) हदीस संग्रह माना जाता है, इसलिए इनमें दिया गया इसरा और मिराज का वर्णन बहुत विश्वसनीय है।

 

1. सीने का शक और बुराक की शुरुआत (सहीह बुखारी 3887)

بَيْنَمَا أَنَا فِي الْحَطِيمِ مُضْطَجِعٌ إِذْ أَتَانِي آتٍ فَشَقَّ مَا بَيْنَ هَذِهِ إِلَى هَذِهِ – يَعْنِي مِنْ ثُغْرَةِ نَحْرِهِ إِلَى شِعْرَتِهِ – فَاسْتَخْرَجَ قَلْبِي، ثُمَّ أُتِيتُ بِطَسْتٍ مِنْ ذَهَبٍ مَمْلُوءَةٍ إِيمَانًا وَحِكْمَةً فَغُسِلَ قَلْبِي ثُمَّ حُشِيَ ثُمَّ أُعِيدَ، ثُمَّ أُتِيتُ بِدَابَّةٍ بَيْضَاءَ دُونَ الْبَغْلِ وَفَوْقَ الْحِمَارِ يُقَالُ لَهُ الْبُرَاقُ، يَضَعُ خَطْوَهُ عِنْدَ أَقْصَى طَرْفِهِ...

पैगंबर फरमाते हैं: “मैं हटिम (काबा के पास एक हिस्सा) में लेटा हुआ था। अचानक कोई (जिब्रील अलैहिस्सलाम) मेरे पास आए। उन्होंने मेरे सीने को यहां से यहां तक चीरायानी गले के नीचे से पेट के ऊपर तक। फिर उन्होंने मेरा दिल निकाला। उसके बाद एक सोने का तसला लाया गया जो ईमान और हिकमत (ज्ञान) से भरा हुआ था। मेरे दिल को उससे धोया गया, फिर उसे ईमान और हिकमत से भरकर वापस मेरे सीने में रख दिया गया।

इसके बाद: “फिर मुझे एक सफेद जानवर लाया गया, जो खच्चर से छोटा और गधे से बड़ा था। उसे बुराक कहा जाता है। वह इतनी तेज़ रफ्तार से चलता था कि उसका हर कदम नजर की आखिरी हद तक पहुंच जाता था।

यह हिस्सा इस बात को दर्शाता है कि इसरा और मिराज से पहले पैगंबर ﷺ का दिल शुद्ध और मजबूत बनाया गया, ताकि वे अल्लाह की बड़ी निशानियां देख सकें। बुराक (Buraq) एक खास जानवर था जिसे अल्लाह ने इस सफर के लिए तैयार किया था।

2. दूध चुनने वाली घटना (सहीह बुखारी में उल्लेखित)

قَالَ جِبْرِيلُ: أَصَبْتَ الْفِطْرَةَ، لَوْ أَخَذْتَ الْخَمْرَ غَوَتْ أُمَّتُكَ

जिब्रील अलैहिस्सलाम ने कहा: “तुमने फितरत (स्वाभाविक सही रास्ते) को चुना। अगर तुम शराब लेते तो तुम्हारी उम्मत गुमराह हो जाती।

व्याख्या:

मस्जिद-ए-अकसा पहुंचने के बाद पैगंबर ﷺ को तीन प्याले पेश किए गए: एक में दूध, एक में शराब और एक में पानी (कुछ रिवायतों में शहद)। पैगंबर ﷺ ने दूध चुना। यह चुनाव फितरत (प्राकृतिक स्वभाव) का प्रतीक था। जिब्रील ने बताया कि दूध चुनने से उम्मत हिदायत पर रहेगी, जबकि शराब चुनने से गुमराही होती। यह इस्लाम में शराब की हराम होने की ओर भी इशारा करता है।

पृष्ठभूमि (घटना का संदर्भ)

नबूवत के दसवें साल में पैगंबर ﷺ को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

  • उनके चाचा अबू तालिब का इंतकाल हो चुका था, जो कुरैश में उनकी मुख्य सुरक्षा थे।
  • उनकी पत्नी हजरत खदीजा رضي الله عنها का भी इंतकाल हो गया था।
  • कुरैश का जुल्म और तंगी चरम पर थी।
  • ताइफ की यात्रा में तो उन्हें पत्थर मारे गए और वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा।

इन मुश्किल हालात में अल्लाह ने पैगंबर ﷺ को इसरा और मिराज का सफर कराकर तसल्ली और सम्मान दिया। यह घटना उनकी नबूवत की सच्चाई और अल्लाह की खास रहमत का प्रमाण है।

इसरा और मिराज की घटना का विस्तृत क्रम (Sequence of events of the Isra and Mi'raj)

प्रमाणिक हदीसों सहीह बुखारी 3887 के अनुसार पैगंबर मुहम्मद ﷺ का यह सफर इस तरह हुआ। हर महत्वपूर्ण घटना को अलग-अलग समझाया जा रहा है:

1. सीने का शक़ (खोलना) और दिल की सफाई

हजरत जिब्रील अलैहिस्सलाम पैगंबर ﷺ के पास आए। उन्होंने सीना गले से पेट के नीचे तक खोला, दिल निकाला और जमजम के पानी से अच्छी तरह धोया। फिर ईमान और हिकमत से भरकर वापस रख दिया।

पैगंबर ﷺ को इस महान सफर और अल्लाह की हाजिरी के लिए पाक-साफ करना। यह सफाई जिस्मानी और रूहानी दोनों थी।

2. बुराक पर मस्जिद--अकसा का सफर

एक चमकदार सफेद जानवर “बुराक” लाया गया। उसका हर कदम नजर की आखिरी हद तक पहुंचता था। पैगंबर ﷺ उस पर सवार होकर मक्का से यरुशलम (मस्जिद-ए-अकसा) पहुंचे।

रास्ते में तीन जगह रुके:

  • मदीना (जहां बाद में हिजरत हुई)
  • माउंट सिनाई (जहां हजरत मूसा अलैहिस्सलाम को तौरात मिली)
  • बैतलहम (हजरत ईसा अलैहिस्सलाम की जन्मस्थली) यह सफर एक रात के छोटे हिस्से में पूरा हुआ – अल्लाह की कुदरत का बड़ा सबूत।

3. मस्जिद--अकसा में नमाज

मस्जिद-ए-अकसा पहुंचकर सभी पिछले पैगंबरों (आदम से ईसा अलैहिमुस्सलाम तक) की रूहें वहां मौजूद थीं। पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने उनकी जमाअत के सामने दो रकअत नमाज की इमामत की।

यह दिखाता है कि पैगंबर ﷺ सारे पैगंबरों के इमाम और आखिरी नबी हैं। सभी पैगंबरों ने उनकी इमामत कबूल की।

4. दूध और शराब का चुनाव

नमाज के बाद दो (या तीन) प्याले पेश किए गए – एक में दूध, दूसरे में शराब। पैगंबर ﷺ ने दूध चुना।

जिब्रील अलैहिस्सलाम ने कहा: “आपने फितरत (प्राकृतिक सही रास्ता) चुना। अगर शराब चुनते तो आपकी उम्मत गुमराह हो जाती।”

सबक: उम्मत की हिदायत और फितरत पर कायम रहने की खुशखबरी।

5. सात आसमानों की सैर

फिर मिराज शुरू हुई। हर आसमान पर एक या दो महान पैगंबर से मुलाकात हुई:

  • पहला आसमान: हजरत आदम अलैहिस्सलाम – दाएं जन्नती, बाएं जहन्नमी देखे।
  • दूसरा: हजरत ईसा और हजरत यह्या अलैहिमुस्सलाम
  • तीसरा: हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम (सबसे खूबसूरत)
  • चौथा: हजरत इदरीस अलैहिस्सलाम
  • पांचवां: हजरत हारून अलैहिस्सलाम
  • छठा: हजरत मूसा अलैहिस्सलाम (रोए क्योंकि उनकी उम्मत कमजोर थी)
  • सातवां: हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम (बैतुल मामूर के पास, जो जन्नत का काबा है)

हर पैगंबर ने पैगंबर ﷺ का इस्तकबाल किया और दुआ दी।

सिदरतुल मुन्तहा और जन्नतजहन्नम का दृश्य

सातवें आकाश के बाद नबी ﷺ सिदरतुल मुन्तहा पहुँचे। यह एक अत्यंत विशाल बिदारा (Lote) का वृक्ष है। इसके फल बड़े-बड़े घड़ों (pots) जैसे और इसके पत्ते हाथी के कानों (elephant ears) के समान बताए गए हैं। यहीं पर फ़रिश्तों का ज्ञान समाप्त हो जाता है। यह स्थान अल्लाह की नूर (divine light) से ढका हुआ था, जिसकी सुंदरता इतनी अधिक थी कि उसे शब्दों में बयान करना संभव नहीं।

हदीस शरीफ में आता है:

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍؓ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ﷺ:
ثُمَّ رُفِعَتْ لِيَ سِدْرَةُ الْمُنْتَهَىٰ، فَإِذَا نَبْقُهَا مِثْلُ قِلَالِ هَجَرَ، وَإِذَا وَرَقُهَا مِثْلُ آذَانِ الْفِيلَةِ

सहीह मुस्लिम, किताबुल ईमान

अनस इब्न मलिक रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “फिर मेरे लिए सबसे दूर की सीमा पर लोटे का पेड़ उगाया गया, और उसके फल हजर के बड़े मिट्टी के बर्तनों जैसे थे, और उसके पत्ते हाथियों के कानों जैसे थे…”

कौसर की नहर और जन्नत की नेमतें

वहीं नबी ﷺ ने कौसर की नहर को देखा। उन्हें जन्नत (paradise) की नेमतें दिखाई गईं—

  • मोतियों से बने घर
  • कस्तूरी की खुशबू वाली भूमि

فَإِذَا أَنَا بِنَهَرٍ حَافَّتَاهُ قِبَابُ اللُّؤْلُؤِ الْمُجَوَّفِ، فَقُلْتُ: مَا هَذَا؟
قَالَ: هَذَا الْكَوْثَرُ

 “मैंने एक ऐसी नहर देखी जिसके किनारे खोखले मोतियों के गुम्बद थे। कहा गया: यह कौसर है।”

 सहीह बुखारी, किताबुर रिक़ाक़

जहन्नम की सजाएँ

(जिना करने वालों की सज़ा)

नबी ﷺ को जहन्नम (hell) भी दिखाई गई, जहाँ विभिन्न गुनाहों की सजाएँ थीं:

فَأَتَيْنَا عَلَى تَنُّورٍ فِيهِ لَغَطٌ وَأَصْوَاتٌ، فَاطَّلَعْنَا فِيهِ، فَإِذَا فِيهِ رِجَالٌ وَنِسَاءٌ عُرَاةٌ
قَالَ: هَؤُلَاءِ الزُّنَاةُ

“फिर हम एक ऐसे तंदूर (भट्ठी) के पास पहुँचे, जिसमें शोर और आवाज़ें थीं। जब हमने उसमें झाँककर देखा, तो उसमें नंगे पुरुष और स्त्रियाँ थे। कहा गया: ये ज़िना (व्यभिचार) करने वाले लोग हैं।

सहीह बुखारी, किताबुत ताबीर

 (सूद खाने वालों की सज़ा)

فَأَتَيْنَا عَلَى نَهْرٍ مِنْ دَمٍ، فِيهِ رَجُلٌ يَسْبَحُ
قَالَ: هَذَا آكِلُ الرِّبَا
“मैंने खून की नदी देखी जिसमें एक व्यक्ति तैर रहा था… बताया गया: यह सूद खाने वाला है।” सहीह बुखारी, किताबुल बयू’”

सहीह बुखारी, किताबुल बयू

जहन्नम में स्त्रियों की अधिकता

يَا مَعْشَرَ النِّسَاءِ، تَصَدَّقْنَ فَإِنِّي رَأَيْتُكُنَّ أَكْثَرَ أَهْلِ النَّارِ
قُلْنَ: وَلِمَ يَا رَسُولَ اللَّهِ؟
قَالَ: تَكْفُرْنَ الْعَشِيرَ، وَتَكْفُرْنَ الْإِحْسَانَ


“ऐ स्त्रियो! सदक़ा किया करो, क्योंकि मैंने तुम्हें जहन्नम वालों में अधिक देखा।”
पूछा गया: क्यों?
आप ﷺ ने फरमाया: “तुम नेमतों की नाशुक्री करती हो और पति की अच्छाइयों को नहीं मानतीं।”

सहीह बुखारी, किताबुल हईज़

नमाज का तोहफा (Gift of Namaz)

सिदरतुल मुंतहा के बाद अल्लाह की खास हाजिरी में पहुंचे। शुरू में उम्मत पर 50 वक्त की नमाज फर्ज हुई।

हजरत मूसा अलैहिस्सलाम ने सलाह दी कि उम्मत के लिए ज्यादा हैं, कम करवाएं। पैगंबर ﷺ बार-बार अल्लाह के पास गए। आखिर में 5 वक्त की नमाज रह गईं, लेकिन 50 का सवाब रखा गया।

वापसी मक्का

पूरी घटना एक ही रात में हुई। सुबह से पहले पैगंबर ﷺ मक्का लौट आए। बिस्तर अभी गरम था।

यह सफर अल्लाह की रहमत और पैगंबर ﷺ की शान का सबसे बड़ा मुजिजा है।

इसरा और मिराज का महत्व

यह घटना पैगंबर मुहम्मद के पैगंबरी होने और उनकी सच्चाई का सबसे बड़ा प्रमाण (proof) है। अल्लाहने संसार की कठिनाइयों और कष्टों के बदले उन्हें आकाश लोकों में विशेष सम्मान (honour) प्रदान किया।

इस घटना का सबसे बड़ा वरदान पाँच समय की नमाज (prayer) है। आरंभ में पचास प्रार्थनाएँ अनिवार्य (mandatory) की गई थीं, लेकिन हज़रत मूसा की सलाह (guidance) पर उनकी संख्या घटाकर पाँच कर दी गई। इसके बावजूद इन पाँच प्रार्थनाओं का पुण्य (reward) पचास प्रार्थनाओं के बराबर रखा गया।

नमाज को मुसलमान का मिराज (spiritual ascent) कहा गया है, क्योंकि इसके माध्यम से मनुष्य का अल्लाहसे सीधा संबंध (direct connection) स्थापित होता है।

 

जब पैगंबर ने इस घटना का वर्णन किया, तो काफ़िरों ने इसका मज़ाक उड़ाया और इसे असंभव बताया। लेकिन हज़रत अबू बक्र सिद्दीक रज़ियल्लाहु अन्हु ने बिना किसी संदेह (doubt) के इस बात पर पूरा विश्वास (belief) किया। इसी अटूट विश्वास के कारण उन्हें सिद्दीक अर्थात सच्चा मानने वाला (truthful believer) की उपाधि मिली।

यह पवित्र यात्रा हमें यह शिक्षा देती है कि कठिन और संकट के समय में भी अल्लाह अपने बंदे को कभी अकेला नहीं छोड़ता। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह नमाज़ की पाबंदी (regular prayer) बनाए रखे और अल्लाहपर पूरा भरोसा  रखे।

निष्कर्ष

इसरा और मिराज की यह महान घटना हमें एक बहुत ही सुंदर संदेश (message) देती है। जब संसार की कठिनाइयाँ चारों ओर से घेर लें, जब अपने और निकटतम लोग भी साथ छोड़ दें, तब भी अल्लाह अपने सेवक को कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उसे अपनी कृपा (mercy) से सम्मानित करता है, आकाश लोकों में विशेष आदर (honour) प्रदान करता है और उसके हृदय को शांति (peace) से भर देता है।

यह पवित्र यात्रा केवल पैगंबर मुहम्मद ﷺ की नहीं है, बल्कि पूरी उम्मत (community) के लिए एक आध्यात्मिक उत्थान (spiritual ascent) का संदेश है। पाँच समय की नमाज़ (five daily prayers) हमें हर दिन अल्लाह के और निकट ले जाती है—यही हमारा वास्तविक आध्यात्मिक सफर (spiritual journey) है।

आइए, हम इस महान वरदान (blessing) का मूल्य समझें। नमाज़ को अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं, पैगंबर ﷺ की सुन्नत पर चलें और कठिन समय में धैर्य तथा विश्वास बनाए रखें।

अल्लाहहमें नमाज़ की नियमितता (regularity), सुन्नत के अनुसरण (following) और जन्नत की राह (path to paradise) पर चलने की शक्ति प्रदान करे।
आमीन, हे सारे संसार के पालनहार (Ameen, Lord of the worlds)।

 

संदर्भ (References)

  • सूरह अल-इसरा (17:1)
  • सूरह अन-नज्म (53:13–18)
  • सहीह बुखारी
  • सहीह मुस्लिम

 

 

लेखक

मुहम्मद कामरान

सेकेंडरी फाइनल ईयर, दारुल हुदा इस्लामिक यूनिवर्सिटी, पश्चिम बंगाल

Disclaimer

The views expressed in this article are the author’s own and do not necessarily mirror Islamonweb’s editorial stance.

Leave A Comment

Related Posts