अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में अरब और मुस्लिम उम्मीदवारों की ऐतिहासिक कामयाबी: सियासत में बढ़ती नुमाइंदगी का नया दौर
प्रस्तावना
अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) में अरब-अमेरिकी और मुस्लिम उम्मीदवारों ने कई ऐतिहासिक कामयाबियाँ हासिल की हैं। इन चुनावों में किसी मुस्लिम का पहली बार अमेरिकी सीनेट (US Senate) के लिए चुना जाना, ग़ज़ा में ज़ख़्मी फ़िलिस्तीनियों का इलाज करने वाले एक सर्जन का कांग्रेस (Congress) पहुँचना और कई फ़िलिस्तीनी-अमेरिकी उम्मीदवारों का चुनाव जीतना अमेरिकी राजनीति में एक अहम बदलाव की निशानी है।
ये कामयाबियाँ इसलिए भी अहम हैं कि चुनाव के दौरान मुस्लिम उम्मीदवारों को इस्लामोफ़ोबिक बयानों (Islamophobic Remarks), राजनीतिक हमलों (Political Attacks) और उनकी वफ़ादारी पर सवाल उठाने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद कई राज्यों के मतदाताओं ने ऐसे उम्मीदवारों पर भरोसा जताया, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं (Healthcare Services), महँगाई (Inflation), आर्थिक इंसाफ़ (Economic Justice), नागरिक अधिकारों (Civil Rights) और विदेश नीति (Foreign Policy) जैसे मुद्दों को अपने चुनावी अभियान (Election Campaign) का हिस्सा बनाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन चुनावों में कम-से-कम सात मुस्लिम उम्मीदवार अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुने गए, जिनमें एक सीनेटर (Senator) और प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) के छह सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा कई अरब और मुस्लिम उम्मीदवारों ने राज्य विधानसभाओं (State Legislatures) में भी कामयाबी हासिल की। इन नतीजों ने अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम और अरब समुदायों की बढ़ती भागीदारी (Political Participation) को एक नई पहचान दी है।
अब्दुल अल-सय्यद: अमेरिकी सीनेट पहुँचने वाले पहले मुस्लिम
इन चुनावों की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक मिस्र मूल के अमेरिकी नेता अब्दुल अल-सय्यद की जीत है। डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) के 42 वर्षीय उम्मीदवार अल-सय्यद ने मिशिगन में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीत लिया। इस तरह वह अमेरिका की सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए।
अब्दुल अल-सय्यद पेशे से डॉक्टर और जनस्वास्थ्य (Public Health) के विशेषज्ञ हैं। उनके चुनावी अभियान में आम लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ (Healthcare Facilities), बढ़ती महँगाई पर काबू पाना और राजनीति में बड़ी कंपनियों के प्रभाव (Corporate Influence) को कम करना प्रमुख मुद्दे थे। उन्होंने इज़राइल को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता (US Military Aid) पर भी सवाल उठाए।
उनके विरोधियों ने उन्हें मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे संगठनों से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इन आरोपों को ख़ारिज किया। इन तमाम राजनीतिक हमलों के बावजूद उनकी जीत ने अमेरिकी राजनीति में एक नई मिसाल कायम की है।
एक और अहम जीत मिस्र मूल के अमेरिकी सर्जन डॉ. आदम हमावी की रही। उन्होंने न्यू जर्सी के 12वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट (Congressional District) से रिपब्लिकन उम्मीदवार ग्रेग मेले को हराया। वह इस राज्य से कांग्रेस के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम प्रतिनिधि बने।
डॉ. हमावी पहले अमेरिकी सेना (US Army) में सर्जन के रूप में सेवाएँ दे चुके हैं। 2004 में इराक़ में एक हेलीकॉप्टर पर हमले के बाद उन्होंने भविष्य की अमेरिकी सीनेटर टैमी डकवर्थ की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। बाद में उन्होंने ग़ज़ा जाकर इज़राइली हमलों में ज़ख़्मी फ़िलिस्तीनियों का इलाज किया। इनमें गंभीर रूप से घायल बच्चे भी शामिल थे।
रशीदा तलाइब और इल्हान उमर: फ़िलिस्तीन के समर्थन में मज़बूत आवाज़ें
इन चुनावों में दो जानी-मानी मुस्लिम महिला सांसदों रशीदा तलाइब और इल्हान उमर ने भी अपनी सीटें बरक़रार रखीं।
फ़िलिस्तीनी मूल की अमेरिकी सांसद रशीदा तलाइब मिशिगन के 12वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से लगातार पाँचवीं बार चुनाव जीतने में कामयाब रहीं। वह 2018 में अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनी जाने वाली पहली दो मुस्लिम महिलाओं में से एक थीं। ग़ज़ा पर इज़राइल की सैन्य कार्रवाई (Military Operation) और अमेरिकी समर्थन की वह लगातार आलोचना करती रही हैं।
इसी तरह सोमाली मूल की अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने मिनेसोटा के 5वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से पाँचवीं बार जीत हासिल की। वह भी 2018 में कांग्रेस पहुँचने वाली पहली दो मुस्लिम महिलाओं में शामिल थीं। उन्होंने आव्रजन (Immigration), नस्ली भेदभाव (Racial Discrimination), नागरिक अधिकारों और फ़िलिस्तीन के मुद्दे पर लगातार अपनी आवाज़ बुलंद की है।
इन दोनों महिलाओं की जीत इस बात का संकेत है कि अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम महिलाएँ अब केवल अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं करा रही हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस (Political Debate) और नीतियों (Policies) को प्रभावित करने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।
इनके अलावा डोमिनिकन मूल की 33 वर्षीय डेमोक्रेटिक उम्मीदवार डारियालिज़ा अविला शेवेलियर ने न्यूयॉर्क के 13वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की। रिपोर्ट के मुताबिक, वह अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनी जाने वाली पहली लैटिना मुस्लिम महिला बनीं।
फ़िलिस्तीनी और अरब-अमेरिकी उम्मीदवारों की बढ़ती कामयाबी
इन चुनावों में फ़िलिस्तीनी मूल के कई उम्मीदवारों की जीत भी विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। न्यूयॉर्क के 12वें स्टेट सीनेट डिस्ट्रिक्ट (State Senate District) से फ़िलिस्तीनी-अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ता (Social Activist) अबेर कवास ने जीत हासिल की। उनका परिवार 1948 में फ़िलिस्तीन से बेदख़ल हुआ था और बाद में अमेरिका में बस गया था।
अबेर कवास ने अपने चुनावी अभियान में सस्ते मकान (Affordable Housing), बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, प्रवासियों के अधिकारों (Immigrants' Rights) और फ़िलिस्तीन के समर्थन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। उनकी जीत अमेरिकी राजनीति में फ़िलिस्तीनी-अमेरिकी समुदाय की बढ़ती नुमाइंदगी (Representation) का एक अहम उदाहरण है।
लेबनानी मूल के अमेरिकी नेता अब्बास अलावीह ने भी मिशिगन के दूसरे स्टेट सीनेट डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की। वह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) के दौरान बने 'अनकमिटेड मूवमेंट' (Uncommitted Movement) के संस्थापकों में शामिल थे। इस आंदोलन ने तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन की इज़राइल के प्रति नीति का विरोध किया था।
भारतीय मूल की मुस्लिम अमेरिकी नेता नबीला सैयद ने इलिनॉय के 26वें स्टेट सीनेट डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्बी हिल्स को हराया। उनकी जीत से यह सीट रिपब्लिकन पार्टी के हाथों से निकलकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पास चली गई।
इसके अलावा इंडियाना से आंद्रे कार्सन और कैलिफ़ोर्निया से लतीफ़ा साइमन ने भी प्रतिनिधि सभा में अपनी सीटें बरक़रार रखीं। कोलोराडो में इमान जोदेह और जॉर्जिया में रुवा रोमन जैसे फ़िलिस्तीनी-अमेरिकी उम्मीदवारों ने भी राज्य विधानसभाओं में कामयाबी हासिल की। इलिनॉय में अब्दुलनासिर रशीद ने भी अपनी सीट बरक़रार रखी।
मुस्लिम महिलाओं में ज़ैनब मोहम्मद, मुनीरा अब्दुल्लाही, मरयम ख़ान और मदीना विल्सन-एंटन की कामयाबी भी उल्लेखनीय रही। वहीं पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी सांसद सलमान भोजानी और सुलेमान ललानी ने टेक्सास में दोबारा जीत हासिल की।
ग़ौरतलब है कि अरब और मुस्लिम उम्मीदवारों की यह राजनीतिक कामयाबी केवल डेमोक्रेटिक पार्टी तक सीमित नहीं रही। लेबनानी मूल के रिपब्लिकन नेता डैरिन लाहुड ने भी इलिनॉय से अपनी कांग्रेस सीट बरक़रार रखी। वह अपनी लेबनानी विरासत पर गर्व करते हैं और अमेरिका-लेबनान संबंधों को बेहतर बनाने के पक्षधर रहे हैं।
निष्कर्ष: अमेरिकी राजनीति में बदलती तस्वीर
2026 के मध्यावधि चुनाव अमेरिकी लोकतंत्र (American Democracy) में अरब और मुस्लिम समुदायों की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी का एक अहम पड़ाव हैं। अमेरिकी सीनेट में पहले मुस्लिम का पहुँचना, ग़ज़ा में ज़ख़्मी फ़िलिस्तीनियों का इलाज करने वाले डॉक्टर का कांग्रेस के लिए चुना जाना और फ़िलिस्तीनी-अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ताओं की जीत इस बदलाव की कुछ प्रमुख मिसालें हैं।
हालाँकि, चुनाव जीतना ही राजनीतिक बदलाव (Political Change) की गारंटी नहीं है। असल अहमियत इस बात की होगी कि ये प्रतिनिधि अपने चुनावी वादों (Election Promises) को किस हद तक अमली जामा पहनाते हैं और आम लोगों की ज़िंदगी में कितनी सकारात्मक तब्दीली लाते हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएँ, आर्थिक असमानता (Economic Inequality), प्रवासियों के अधिकार, नस्ली भेदभाव और नागरिक आज़ादी (Civil Liberties) जैसे मुद्दे उनके सामने बड़ी चुनौतियाँ होंगे। इसके साथ ही फ़िलिस्तीन और ग़ज़ा के बारे में उनका मौक़िफ़ और इज़राइल को अमेरिकी सैन्य सहायता का सवाल भी अंतरराष्ट्रीय बहस (International Debate) का अहम हिस्सा बना रहेगा।
बहरहाल, इन चुनावों का एक बड़ा संदेश यह है कि अरब और मुस्लिम अमेरिकी अब केवल राजनीतिक घटनाओं के दर्शक नहीं रहे, बल्कि देश की नीतियों और भविष्य को तय करने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी कांग्रेस और राज्य विधानसभाओं में उनकी बढ़ती मौजूदगी इस बात की निशानी है कि अमेरिकी लोकतंत्र की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है।
संदर्भ:
The New Arab – Arab and Muslim Candidates Make History in US Midterm Elections
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