सुमय्या परवीन
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इस्लाम केवल कुछ इबादतों का नाम नहीं है, बल्कि यह एक मुकम्मल जीवन-व्यवस्था (Complete Way of Life) है। इस्लाम की इमारत दो मज़बूत बुनियादों पर खड़ी है—ईमान और अमल। अगर ईमान सही होगा, तो इंसान के अमल भी सही होंगे। लेकिन अगर ईमान कमज़ोर हो जाए, तो अच्छे अमल भी धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।
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हर साल जब मुहर्रम का महीना आता है, तो हमारे समाज में एक सवाल बार-बार सामने आता है। कई जगहों पर ताज़िए बनाए जाते हैं, जुलूस निकाले जाते हैं और तरह-तरह की रस्में की जाती हैं।
अपने सवाल और फ़तवे पूछें।
सवाल को जितना हो सके साफ़-साफ़ लिखें और हिंदी में टाइप करें। टाइप करते समय ग़लतियों से बचें। एक साथ कई सवाल न पूछें।
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